Thursday, August 29, 2019

यादें

लिखने आज बैठें है।
बहुत सालों के बाद।।
कलम तोह उठा ली।
पर क्या लिखें कुछ पता नही।।

बीत जो इतने बरस गए।
बातें सब मन में दबीं हुईं।।
अब क्या इनको दोहराऊं उनको?
अब क्यों उनको फिर याद करूँ?

एक बार देखा उन्न किताबों को।
सीशे की अलमारी के परे जो लेटी थीं।।
मेरी हर याद का बोझ लिए।
कितने आराम से सोईं हुईं थीं।।

फिर नज़र घुमाई
उस सामने रखी कोरी किताब पर
ताज़े पन्नो की झुशबू
अब क्यों डरता है मन
क्यों है इतना संकोच
इन् यादों को अब
याद करने से क्यों
हाथ जैसे कांप उठते हैं

शायद उम्र हो चली है अब
या यादें कुछ भारी